चीन को कड़ा संदेश देते हुए ​वायुसेना ने एलएसी पर दागीं 10 आकाश मिसाइलें

04/12/2020,10:37:06 PM.

स्वचालित जानकारी के प्रावधान को सक्षम बनाता है और दो समर्पित चैनलों पर काम करता है।
– पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत ने तैनात कर रखा है आकाश एयर डिफेंस सिस्टम
– ​दुश्मन के लड़ाकू विमानों को 30 किलोमीटर पहले ही मार गिराने में सक्षम

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शुक्रवार को 10 आकाश मिसाइलें दागीं।चीन के साथ तनाव की शुरुआत के समय से ही पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत ने स्वदेश निर्मित आकाश एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखा है। यह मिसाइल दुश्मनों के विमानों को चंद मिनटों में मार गिराने में सक्षम हैं। मिसाइल दागने की क्षमता के परीक्षण के वक्त इस बात का ध्यान रखा गया कि संघर्ष बढ़ने की सूरत में अगर दुश्मन के विमान भारतीय वायु सीमा का उल्लंघन करें तो उन्हें हर परिस्थिति में मार गिराया जाए। इसके साथ ही कंधे पर रखकर हवा में मार करने वाली इग्ला मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया।

डीआरडीओ निर्मित यह प्रणाली ​​दुश्मन के लड़ाकू विमानों का 30 किलोमीटर पहले ही पता लगाकर उसे नीचे ला सकती है। आकाश मीडियम रेंज की हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन, भारत डायनेमिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने तैयार किया है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमान को 30 किमी. दूर व 18 हजार मीटर ऊंचाई तक टारगेट कर सकती है। इसमें लड़ाकू जेट विमानों, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर करने की क्षमता है। यह भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के साथ परिचालन सेवा में है।

आकाश प्रक्षेपास्त्र की एक बैटरी में तीन-तीन मिसाइलों के साथ चार लांचर हैं, जो सभी एक दूसरे से जुड़े हैं। प्रत्येक बैटरी 64 लक्ष्यों तक को ट्रैक कर सकती है और उनमें से 12 तक पर हमला कर सकती है। आकाश प्रणाली पूरी तरह से गतिशील है और वाहनों के चलते काफिले की रक्षा करने में सक्षम है। लांच प्लेटफार्म को दोनों पहियों और ट्रैक वाहनों के साथ एकीकृत किया गया है जबकि आकाश सिस्टम को मुख्य रूप से एक हवाई रक्षा (सतह से हवा) के रूप में बनाया गया है। इसे मिसाइल रक्षा भूमिका में भी टेस्ट किया गया है।

पिछले हफ्ते ही इस मिसाइल का सफल परीक्षण आंध्र प्रदेश के सूर्यलंका परीक्षण रेंज में किया गया था। इन आकाश मिसाइलों को एयरफोर्स ने कम्बाइंड गाइडेट वैपन्स फायरिंग-2020 एक्सरसाइज के दौरान फायर किया। फायरिंग के दौरान ज्यादातर मिसाइलों ने अपने टारगेट पर सीधा निशाना साधा। आकाश मिसाइल को हाल ही में अपग्रेड किया गया है जिसके बाद इसके टारगेट पर वॉर करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। डीआरडीओ अब आकाश प्राइम मिसाइल सिस्टम पर काम कर रहा है। इसमें बहुत ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर भी टारगेट को निशाना बनाने की क्षमता होगी। इसके अलावा लंबी दूसरी पर दुश्मन के लड़ाकू विमान को भी मार गिराने की ताकत होगी।

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