पाकिस्तानी अखबारों सेः भारत में किसान आंदोलन को छात्रों व खिलाड़ियों का भी समर्थन

04/12/2020,8:17:32 PM.

नई दिल्ली (एजेंसी)। पाकिस्तान से प्रकाशित होने वाले अधिकांश समाचारपत्रों ने आज प्रधानमंत्री इमरान खान की संयुक्त राष्ट्र आमसभा से सम्बोधन की खबर देते हुए कहा है कि इस मौके पर इमरान खान ने दुनिया के अमीर देशों से कोरोना वायरस के मद्देनजर कमजोर मुल्कों की मदद करने का आह्वान किया है। अखबारों का कहना है कि इमरान खान ने कहा है कि जब तक कोविड-19 महामारी है तब तक अमीर देशों को कर्ज की अदायगी पर जोर नहीं देना चाहिए बल्कि कर्ज माफ कर देना चाहिए।
इमरान खान ने पाकिस्तान के 20 लाख परिवारों को फायदा पहुंचाने के लिए परिवार के बुजुर्गों को दो हजार रुपये महीने की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। अखबारों ने पाक सेना के प्रवक्ता के हवाले से यह भी खबर दी है कि सीपैक मंसूबे को नाकाम बनाने की भारत सरकार की हर कोशिश को असफल करने की परियोजना पाकिस्तान सेना ने बना लिया है, जिसे चीन ने भी सराहा है। इसी खबर में यह हवाला दिया गया है कि सीपैक मंसूबे को नाकाम बनाने के लिए भारत अफगानिस्तान की जमीन का आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

अखबारों ने जनरल असेंबली में पाकिस्तान के अंतर धार्मिक और सांस्कृतिक संवाद के प्रस्ताव को पास किए जाने की भी खबर दी है। ये सभी खबरें रोजनामा औसाफ, रोजनामा जंग, रोजनामा जिन्नाह, रोजनामा नवाएवक्त, रोजनामा पाकिस्तान ने पहले पृष्ठ पर प्रकाशित की है। रोजनामा नवाएवक्त ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन की खबर देते हुए कहा है कि इस आंदोलन को खिलाड़ियों और छात्र नेताओं का समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और कुछ खिलाड़ियों के जरिए सरकार से उन्हें मिले सम्मान को वापस करने की खबर दी गई है। अखबार का कहना है कि किसानों के आंदोलन की वजह से राजधानी दिल्ली आने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं, जिसकी वजह से राजधानी में आने जाने वालों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

अखबार ने यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के हवाले से यह खबर दी है कि पाकिस्तान में कोरोना महामारी की वजह से बंद चल रहे स्कूलों के कारण बच्चों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन क्लासेस को बच्चे कवर नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

रोजनामा औसाफ ने यूरोपियन यूनियन के जरिए पाकिस्तान एयरलाइंस के विमानों की आवाजाही पर अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंध लगाने की खबर प्रकाशित की है। अखबार का कहना है कि सिविल एविएशन अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने की वजह से यह फैसला लिया गया है। अखबार ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के इस रिमार्क को भी प्रमुखता से जगह दी है, जिसमें खैबरपख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री को कहा गया है कि वह अगर अपने राज्य में लोगों को सुविधाएं नहीं दे सकते तो गद्दी छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट के जज ने अपने रिमार्क में कहा है कि सीवर खोदने के लिए भी एशियाई डेवलपमेंट बैंक से कर्ज लिया जाता है। अदालत ने नेब पर भी शिकंजा कसते हुए कहा है कि अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों को 90 दिनों तक रिमांड पर देना ठीक नहीं है।

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