फरार जीजेएम सुप्रीमो बिमल गुरुंग तीन सालों बाद आए नजर, पाला बदल ममता का हाथ थामा

21/10/2020,9:19:06 PM.

कोलकाताः गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) सुप्रीमो बिमल गुरुंग 2017 के पृथक गोरखालैंड आंदोलन में देशद्रोह (यूएपीए) का केस दर्ज होने के तीन सालों बाद बुधवार को पहली बार कोलकाता में नजर आए। लेकिन उन्होंने पाला बदलकर बंगाल की राजनीतिक गलियारे में एक बड़ा तूफान मचा दिया है। दरअसल गुरुंग ने भाजपा का साथ छोड़कर अब ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में पहाड़ी क्षेत्रों को पृथक गोरखालैंड बनाने की मांग पर लगातार आंदोलन करने वाले गोरखा जन मुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) के संस्थापक और अध्यक्ष विमल गुरुंग ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को करारा झटका दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी नित एनडीए का साथ छोड़कर ममता बनर्जी की पार्टी के लिए काम करने की घोषणा बुधवार को की है। कोलकाता के सॉल्ट लेक में एक होटल में उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान यह घोषणा की।

इस दौरान भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए विमल गुरुंग ने कहा कि पृथक गोरखालैंड बनाने का वादा भाजपा ने किया था लेकिन इस बारे में कोई काम नहीं किया गया। इसलिए वह एनडीए से अलग होकर ममता बनर्जी के साथ देंगे। विमल गुरुंग ने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उत्तर बंगाल में वह जी तोड़ कोशिश करेंगे। सीएम बनर्जी की तारीफ करते हुए गुरु ने कहा कि ममता बनर्जी ने आज तक उत्तर बंगाल के लिए जो भी वादा किया है, उसे पूरा किया है, इसलिए वह उनके लिए काम करेंगे। दरअसल गुरुंग का भाजपा से अलग होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार उत्तर बंगाल की 12 विधानसभा सीटों पर विमल गुरुंग की पार्टी का बेहतर जनाधार और प्रभाव है। छह से सात महीने के अंदर पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव होना है और ऐसे समय में सबसे पुराने सहयोगियों में से एक रहे गुरुंग का अलग होना निश्चित तौर पर भाजपा के लिए नुकसान का सबब होगा।

2017 से फरार थे गुरुंग –
2017 में पहाड़ पर पृथक गोरखालैंड के लिए ममता बनर्जी के खिलाफ 104 दिनों तक हिंसक आंदोलन हुआ था। उस दौरान कई सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी गई थी और कई लोगों की हत्याएं हुई थीं, जिसमें पुलिस अधिकारी अमिताभ मल्लिक की भी हत्या हुई थी। इसका आरोप विमल गुरुंग पर ही लगा है। उनके खिलाफ देशद्रोह की धाराओं के साथ-साथ 150 से अधिक मामलों में गैर जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज हैं। वह बंगाल पुलिस के लिए वांटेड अपराधी रहे हैं और तीन सालों से फरार थे लेकिन बुधवार अपराह्न अचानक झारखंड नंबर की एक गाड़ी में बैठकर वह सॉल्टलेक के गोरखा भवन के पास जा पहुंचे। वह वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले थे लेकिन अंदर से दरवाजा नहीं खोला गया जिसकी वजह से वह कुछ देर इंतजार करने के बाद साल्टलेक के एक होटल में पहुंचे। वहीं पर उन्होंने मीडिया से बात की और उक्त घोषणा की है।

दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर बंगाल की सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने शानदार जीत हासिल की है। इसके बाद से विधानसभा चुनाव में भी उन क्षेत्रों में भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है। हालांकि भाजपा को गोरखा समुदाय का व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ था। लोकसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी उत्तर बंगाल में एक बार फिर अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी हुई थीं और भाजपा को भी इस बात का अहसास हो गया था। इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सोमवार को ही उत्तर बंगाल के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी में पहुंचे थे लेकिन अब विमल गुरुंग के अलग होने से यह देखने वाली बात होगी कि भाजपा के सांगठनिक सेहत पर क्या कुछ असर पड़ता है।

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