रिया चक्रवर्ती क्यों शिवसेना व महाराष्ट्र सरकारी की भाषा बोल रही है?

10/08/2020,6:47:31 PM.

कोलकाताहिंदी.कॉम

कोलकाताः बॉलीवुड के दिवंगत युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत की सीबीआई जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील करने वाली रिया चक्रवर्ती अब क्यों सीबीआई जांच का विरोध कर रही है? वह क्याें महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना की भाषा बोल रही है? और, वह क्यों अब राजनीतिक कार्ड भी खेलने लगी है?

सुशांत की स्वयं को गर्लफ्रेंड बताने वाली रिया चक्रवर्ती ने आज फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने एक नया हलफनामा दायर कर मांग की है कि सुशांत मामले की सीबीआई जांच नहीं कराई जाए। उसने यह भी कहा कि बिहार सरकार को यह हक नहीं बनता है कि वह सीबीआई जांच की सिफारिश करे। रिया ने राजनीतिक कार्ड खेलते हुए कहा है कि चूंकि बिहार में चुनाव होने वाला है इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुशांत मामले का राजनीतिक फायदा लेने के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश की है। रिया ने एक बड़ा आरोप मीडिया पर लगाया है कि सुशांत की मौत के मामले का मीडिया ट्रॉयल किया जा रहा है और उसे उसकी मौत के लिए जिम्मेवार बताया गया है। हालांकि रिया ने तो मीडिया ट्रॉयल की बात कही है लेकिन उसने सोशल मीडिया पर जो इतने दिनों से उसके खिलाफ गुस्सा उबल रहा है, इसपर उसने कुछ नहीं कहा है।

सुशांत की संदिग्ध मौत के मामले में बुरी तरह घिर चुकी रिया चक्रवर्ती दरअसल अब वही भाषा बोल रही है जो इतने दिनों से महारष्ट्र सरकार और शिवसेना  बोल रही थी। महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस ने पटना में एफआईआर दर्ज करने का विरोध किया है। इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार ने भी केस ट्रांसफर की मांग करते हुए एक अलग से सुप्रीम कोर्ट में हलफनाम दिया है। महाराष्ट्र सरकार भी सीबीआई जांच का विरोध कर रही है जबकि मुंबई पुलिस ना तो सुशांत की मौत के सही तथ्य उजागर करने में सफल रही है, बल्कि उसने केस की जांच की जबरदस्ती दिशा बदलने की कोशिश की है। वह शुरू से सुशांत की मौत को सुसाइड बताने पर अड़ी है। मुंबई पुलिस रिया को बचाने में लगी है। जब बिहार पुलिस मुंबई जांच के लिए गई तो रिया को एक तरह से गायब कर दिया गया। और, इस बीच मुंबई के डीसीपी से रिया की लगातार बात होती रही।

दरअसल सुशांत मामले में रिया की तरह ही उद्धव ठाकरे की सरकार भी बुरी तरह घिर गई है। उसने अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह से खो दी है और वह जांच में सहयोग कर अपना सम्मान बचाने के बजाए सुशांत की मौत को राजनीतिक रूप दने की कोशिश कर दी है। अगर उसने उसने शुरू से ही सुशांत मामले की जांच मुंबई पुलिस से कराई होती तो आज यह नौबत नहीं आती। उद्धव ठाकरे की सरकार की अब तक की करतुतों की वजह से लोगों में यह धारणा प्रबल हो गई है कि सुशांत की मौत के मामले में किसी बड़ी मछली को बचाया जा रहा है।

 

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