शुभेंदु एक साल से बना रहे थे प्लानिंग, एक तिहाई सीटों पर बढ़ाया प्रभाव

29/11/2020,5:14:52 PM.

कोलकाता:  ममता बनर्जी के कैबिनेट से दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने जब इस्तीफा दे दिया है तब यह समझ में आ रहा है कि उन्होंने मंत्री पद छोड़ने से पहले लंबी प्लानिंग की थी। उन्होंने एक साल तक सभाएं, मीटिंग्स, रणनीति और योजना बनाकर ऐसा मास्टर स्ट्रोक खेला है कि मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद ममता बनर्जी राज्य की एक तिहाई सीटों पर कमजोर पड़ गई हैं।
शुभेंदु अधिकारी के परिवार का राज्य की 35 विधानसभा सीटों पर दबदबा है। उनके समर्थक ना केवल तृणमूल कार्यकर्ता हैं बल्कि बड़े पैमाने पर विधायक और मंत्री भी शुभेंदु अधिकारी के करीबी हैं और उनके एक इशारे पर सरकार का साथ छोड़ सकते हैं। फिलहाल मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया इसलिए मुख्यमंत्री उनसे बातचीत कर हालात को संभालने में जुटी हुई हैं। लेकिन शुभेंदु के करीबी सूत्रों के अनुसार अब वह तृणमूल के साथ नहीं रहेंगे। उनके समर्थक कार्यकर्ता और विधायक तथा मंत्री अलग दल बनाकर आंदोलन के मूड में हैं।
 केवल शुभेंदु अधिकारी के इशारे का इंतजार किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पार्टी के कई बड़े फैसले ले रहे हैं और उन्हें सीएम की अगली पीढ़ी के नेतृत्व के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। इससे शुभेंदु की तरह पार्टी के अन्य विधायक भी नाराज हैं जो जल्द ही ममता का साथ छोड़ सकते हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों से कहा है कि वो सड़क पर उतरने के लिए गोलबंद हो जाएं। उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को भी जनता के बीच उतरने को कहा है। एक नेता ने कहा कि पूरा अधिकारी समर्थक कैडर सड़क पर उतरने को तैयार है और अभी से चुनावी मोड में आ गया है। उन्हें इंतजार है तो सिर्फ अपने नेता की हरी झंडी का। समर्थकों ने बताया कि इसके लिए पिछले एक साल से तैयारियां चल रही थीं। हावड़ा, हुगली, कोलकाता, बीरभूम से लेकर झारग्राम और सिलीगुड़ी तक उनके पोस्टर्स लहराते हुए पाए गए।
 13 साल पीछे 2007 में जब ममता बनर्जी साढ़े तीन दशक से बंगाल में सत्ता भोग रहे वामपंथियों को बाहर करने के लिए नंदीग्राम हड़ताल पर थीं। इसी कार्यक्रम ने राज्य में सत्ता हस्तानांतरण की स्क्रिप्ट लिख दी थी। नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर में ही स्थित है और उस हड़ताल के आयोजन में सबसे बड़ी भूमिका अधिकारी परिवार की ही थी। राज्य में सिंचाई, यातायात एवं जल मंत्रालय संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी भी नंदीग्राम से ही विधायक हैं। अब स्थिति ये है कि इस हड़ताल की याद में जो समारोह हुआ, उसमें ममता बनर्जी की तस्वीर ही नहीं थी। जिस तरह से पिछले कुछ महीनों से उनके कार्यक्रम बिना टीएमसी बैनर के हो रहे थे, स्पष्ट है कि इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। मुर्शिदाबाद, झाड़ग्राम, बीरभूम, मालदा, पुरुलिया और बांकुड़ा- ये वो छह जिले हैं, जहां शुभेंदु ने तृणमूल को कड़ी मेहनत करके स्थापित किया। शुभेंदु अधिकारी के पिता और उनके दोनों भाई उनके हर निर्णय को मानते आ रहे हैं और वो अब भी उनके ही साथ हैं।
 हुगली में सिंगूर के विधायक रबीन्द्रनाथ भट्टाचार्जी भी तृणमूल से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दे रखी है। वे पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष पद से अपने करीबी को हटाए जाने से नाराज बताए जाते हैं।

 

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