रामबहादुर राय ने सबसे पहले उठाई थी शिक्षा मंत्रालय की बात

30/07/2020,11:27:08 AM.

जितेन्द्र तिवारी
नई दिल्लीः देश के जाने-माने आंदोलनकारी और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने आज मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का नाम बदले जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनके एक आग्रह को आज भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया। बुधवार को कैबिनेट के फैसले के बाद मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय अब फिर से शिक्षा मंत्रालय कहलाएगा।

हालांकि राम बहादुर राय इस मुद्दे पर अब न ही कोई टिप्पणी करना चाहते हैं और न ही इसका श्रेय लेने की मंशा रखते हैं लेकिन छात्र आंदोलन की पहचान रहे भारत के पहले मीसाबंदी रामबहादुर राय को हमेशा से लगता था कि शिक्षा से जुड़े कार्य करने वाले मंत्रालय का नाम मानव संसाधन क्यों होना चाहिए। उनका मानना रहा है कि मानव संसाधन मंत्रालय अपने नाम से लोगों की नौकरियों के नियोजन जैसा श्रम मंत्रालय लगता है। जबकि शिक्षा मंत्रालय के नाम से पैदा होने वाली प्रतिध्वनि मन पर गहरा असर डालती है। इसलिए वे लंबे समय से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को फिर से शिक्षा मंत्रालय नाम दिए जाने की वकालत करते रहे हैं।

यही मांग उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने भी दोहराई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय सहमति जताई और आज नाम बदल गया। वाक्या 29 सितम्बर, 2018 का है। तब नई दिल्ली के विज्ञान भवन में देश भर के विश्वविद्यालयों के कुलपति, उपकुलपति और शिक्षा संस्थानों के महानिदेशकों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन हुआ था। यूजीसी, एआईसीटीई, आईसीएसएसआर, आईजीएनसीए, जेएनयू और एसजीटी यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का विषय था- ‘कांफ्रेंस ऑफ एकेडेमिक लीडर्स ऑन एडुकेशन फॉर रिसर्जेंस’। इसमें 400 से ज्यादा शिक्षाविद् शामिल हुए। इस सम्मेलन में जो पत्र पढ़े गए और जो शोध शामिल किए गए, उसके संकलन को ‘शिक्षा का राष्ट्रीय उपनिषद्’ कहा गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था और तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ इसी मंत्रालय के राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह पूरे समय इस सम्मेलन में उपस्थित रहे थे। उद्घाटन सत्र में ही अपने प्रास्ताविक भाषण में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने राजीव गांधी द्वारा शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय करने को अनुचित बताया और प्रधानमंत्री से मांग की कि इसे दोबारा शिक्षा मंत्रालय का नाम दिया जाए। यही नाम इसे सार्थकता प्रदान करेगा। उनकी इस मांग का वहां उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने जोरदार तालियों से समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने मुस्करा कर और सर हिलाकर जैसे स्वीकृति प्रदान की। उस सम्मेलन में ही तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की उपस्थिति में एचआरडी मिनिस्ट्री का नाम शिक्षा मंत्रालय किये जाने का बाकायदा एक प्रस्ताव भी पारित हुआ था। आज प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने का फैसला लिया गया (खबर व फोटो साभार-हिंदुस्थानसमाचार.इन)।

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