सुनीत शर्मा ने रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष एवं सीईओ का पदभार संभाल, पूर्व रेलवे के थे जीएम

01/01/2021,5:18:59 PM.

नई दिल्लीः रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सुनीत शर्मा ने शुक्रवार को रेलवे बोर्ड (रेल मंत्रालय) के नये अध्‍यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तथा भारत सरकार के पदेन प्रमुख सचिव का पदभार संभाल लिया।

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने गुरुवार को सुनीत शर्मा की रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष एवं सीईओ के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी थी। इससे पूर्व सुनीत शर्मा पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) के रूप में काम कर रहे थे।

सुनीत शर्मा का परिचय

सुनीत शर्मा ने वर्ष 1979 में एक स्‍पेशल क्‍लास अप्रेन्टिस के रूप में भारतीय रेलवे में नियुक्ति पाई थी। उस समय वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। सुनीत शर्मा मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्‍नातक हैं और उन्‍हें भारतीय रेलवे में विभिन्‍न पदों पर काम करने का 40 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्‍त है। उन्‍होंने ऑपरेशनल वर्किंग, शेड डिपो और वर्कशॉप में स्टिन्‍ट भी किया है। वे मुंबई में परेल वर्कशॉप के मुख्‍य कार्यशाला प्रबंधक भी रहे, जहां उन्‍होंने पर्वतीय रेलवे के लिए नेरो गेज लोकोमोटिव्‍ज के निर्माण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्‍होंने मुंबई के निकट विरासत माथेरान लाइन के लिए पुराने नेरो गेज भाप इंजन की बहाली भी की थी। वर्ष 2006 में मुंबई उपनगरीय रेल विस्‍फोटों के दौरान शर्मा उस टीम का हिस्‍से थे, जिसने इन आतंकवादी हमलों के कुछ घंटों के दौरान ही उपनगरीय नेटवर्क को ठीक कर दिया था। मुंबई सीएसटी के एडीआरएम के रूप में उन्‍हें उपनगरीय नेटवर्क की सेवा बढ़ाने का श्रेय भी प्राप्‍त है, जिसे मुंबई की जीवन रेखा माना जाता है। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान भी, वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने मुंबई सीएसटी, मध्य रेलवे पर हुए हमलों के बाद सेवा सुचारू रूप से शुरू करने का प्रबंधन किया था। पुणे में डीआरएम के रूप में बुनियादी ढांचे का विस्‍तार करने में उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण परिचालन क्षमता में बढ़ोतरी हुई थी। डीजल लोकोमोटिव वाराणसी में मुख्य यांत्रिक अभियंता के रूप में विद्युत लोकोमोटिव उत्‍पादन शुरू करने वाली टीम का उन्‍होंने नेतृत्‍व किया था। डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजन में परिवर्तित करने का काम उन्‍हीं के नेतृत्‍व में हुआ था। यह कार्य दुनिया में कहीं भी पहली बार उनके नेतृत्‍व में ही रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया था।

मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली के महाप्रबंधक रूप में उन्होंने एक वर्ष में बहुत अधिक आवश्यक आधुनिक यात्री डिब्बों का निर्माण दोगुना करने का कीर्तिमान स्थापित किया था।

पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक रूप में उन्होंने माल गाड़ियों की गति रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाने की पहल शुरू की थी। उन्‍होंने नई लाइनों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया, जिससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ी, बल्कि स्थानीय क्षेत्रों का विकास भी हुआ। उन्‍हें काम को आसान बनाने और प्रशासनिक सुधारों के लिए प्रणालीगत बदलाव लाने के लिए भी जाना जाता है।

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