कभी जयललिता ने ममता की तरह अधिकारियों को दिल्ली भेजने से किया था इन्कार

14/12/2020,12:24:55 PM.

 

कोलकाता: राज्य में जपी नड्डा प्रकरण के बाद से केंद्र और राज्य सरकार के बीच तल्खियां धीरे-धीरे ही सही पर तेज होने लगी हैं। जेपी नड्डा के काफिले पर हमले के मामले में केंद्र सरकार ने तीन आईपीएस अफसरों को प्रतिनियुक्ति पर बुलाया है, जिसे ममता बनर्जी की सरकार ने इनकार कर दिया है। बता दें कि साल 2001 दक्षिण बारत के तमिलनाडु राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने भी ऐसे एक मामले को मानने से इन्कार कर दिया था। पश्चिम बंगाल सरकार ने आईपीएस अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए आईपीएस अधिकारियों को केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर भेजने से इन्कार किया है।

आपको बता दें कि ठीस इसी प्रकार से केंद्र और राज्य सरकार के बीच साल 2001 में ठनी थी। 13 मई, 2001 को जयललिता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। संभवतः जून माह के शेष सप्ताह में तमिलनाडु पुलिस की सीआईडी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के घर पर छापा मारा और करूणानिधि और तत्कालीन अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार के समय केंद्र में मंत्री मुरासोली मारन और टीआर बालू को गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद केंद्र ने इस मामले में राज्य की तत्कालीन राज्यपाल फातिमा बीवी को हटा दिया। क्योंकि केंद्र सरकार राज्यपाल की रिपोर्ट से खुश नहीं थी। इसके साथ ही छापे में शामिल तीन आईपीएस अधिकारियों की पहचान की गई, जिसमें तत्कालीन चेन्नई पुलिस आयुक्त के. मुथुकरुप्पन, संयुक्त आयुक्त सेबेस्टियन जॉर्ज और उपायुक्त क्रिस्टोफर नेल्सन शामिल थे। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इन तीनों अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली बुला लिया था।

तब जयललिता ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह उन अधिकारियों को दिल्ली भेजने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही जयललिता ने अन्य मुख्यमंत्रियों को राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए चिट्ठी भी लिखी थी।

नियम यह कहता है

केंद्र सरकार ही आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को कैडर आवंटित करता है। गृह मंत्रालय आईपीएस कैडर, आईएएस कैडर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग और आईएफएस कैडर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन आते हैं।

नियम के मुताबिक, राज्य सरकार के अधीन तैनात सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ केंद्र कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 7 में कहा गया है कि यदि अधिकारी राज्य के मामलों के संबंध में सेवा कर रहा है, तो प्राधिकरण कार्यवाही करने और जुर्माना लगाने का अधिकार राज्य सरकार का होगा। अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) के एक अधिकारी पर की जाने वाली किसी भी कार्रवाई के लिए, राज्य और केंद्र दोनों को सहमत होने की आवश्यकता होती है। भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 6 (1) में प्रतिनियुक्ति के बारे में कहा गया है: किसी भी असहमति के मामले में केंद्र सरकार द्वारा निर्णय लिया जाएगा और उसे राज्य लागू करेंगी।

राज्य के इन आईपीएस को किया गया दिल्ली तलब
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्र द्वारा मांगे गए अधिकारियों में राजीव मिश्रा (अतिरिक्त महानिदेशक, दक्षिण बंगाल), प्रवीण त्रिपाठी (उप महानिरीक्षक, प्रेसीडेंसी रेंज) और भोलानाथ पांडे (एसपी, डायमंड हार्बर) हैं. इन अधिकारियों को दिल्ली भेजने से ममता सरकार ने मना कर दिया है।

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