news prahar 02102020

02/10/2020,12:33:03 PM.

-महिलाओं की उपेक्षा का आरोप लगा तृणमूल छोड़ कांग्रेस का दामन थामा

-कांग्रेस का कृषि बिल के विरोध में धरना-प्रदर्शन

 

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया एक महिला हैं। ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री भी हैं। महिलाओं को लेकर अकसर वह आवाज बुलंद करती हैं..–तृणमूल कांग्रेस के संगठन में महिलाओं की बड़ी संख्या है लेकिन यह अजीब बात है कि शुक्रवार को कुछ महिला तृणमूल कार्यकर्ताओं ने इसलिए अपनी पार्टी का दामन छोड़ दिया कि तृणमूल कांग्रेस में महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता है…उनकी बातों को तरजीह नहीं दी जाती है… तृणमुूल के कुल्टी बलॉक से जुुड़ी आशा चक्रवर्ती, गजाला अजीली समेत करीब दो दर्जन से अधिक महिलाओं ने कांग्रेस का झंडा थाम लिया है….कांग्रेस के जिला अध्यक्ष तरुण राय ने इन महिलाओं को पार्टी का झंडा थमाकर कांग्रेस में शामिल कराया। कांग्रेस में शामिल हुईं इन राजनीतिक महिला कार्यकर्ताओं ने कहा कि तृणमूल में उनकी लगातार उपेक्षा की जा रही  थी जिससे  बाध्य होकर होकर वह तृणमूल छोड़ना पड़ा……——बाइट-(सभी का)

कांग्रेस द्वारा शुक्रवार को कृषि बिल के विरोध में आसनसोल कोर्ट के सामने गांधी जी की मूर्ति के सामने धरना भी दिया गया। यहां बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

 

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नियामतपुर फाड़ी, सीतारामपुर चबका के नामो पाड़ा के जंगल,

राजाराम बाऊरी,  26 नियामतपुर फाड़ी के भाड़रा ग्राम निवासी, मो. समीर (काजू) के साथ झमेला,

 

-सीतारामपुर में मिली लापता युवक की लाश, प्रेम प्रसंग में हत्या की आशंका

-पुलिस के डॉग स्कॉवड ने की जांच, महिला से पूछताछ

कथित हत्या का सुराग तलाशने के लिए दौड़ता हुआ पुलिस के डॉग स्कावयड का विशेष रूप से यह प्रशिक्षित कुत्ता….. पीछे-पीछे भागती पुलिस… और लोगों का लगा मजमा,…यह किसी फिल्म का कोई सीन नहीं है….आप जो देख रहे हैं यह वास्तविक है…और यह आसनसोल शिल्पांचल के ही नियामतपुर पुलिस फाड़ी के तहत आने वाले सीतारामपुर इलाके का है…दरअसल झाड़ियों के बीच पेड़ से लटकता और जमीन पर बैठा दिख रहा यह युवक गुरुवार की रात से गायब था….इसका नाम राजाराम बाउरी बताया गया है। उम्र महज 26 साल है…इसके रहने का ठिकाना भड़रा ग्राम है….शुक्रवार की सुबह यह सीतारामपुर चबका के नामो पाड़ा के जंगलों में मृत पाया गया…जिस अवस्था में इसकी लाश मिली है, इससे राजाराम के परिवार और इलाके के लोगों को लगता है कि उसकी हत्या की गई है और लाश को यहां पेड़ से लटका कर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है। उसके बदन में चोट के निशान हैं और खून निकलतेे हुए दिखे हैं, इससे यह साबित हो रहा है कि इसकी हत्या की गई है…..बहरहाल पेड़ से जमीन पर लगती हुई और रस्सी के सहारे बंधी हुई लाश मिलने के बाद से नामो पाड़ा में गुस्सा है। घटना की खबर जब राजाराम बाउरी के गांव भड़रा पहुंची तो वहां से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर आ गए…घटना की सूचना पाकर नियातमपुर फाड़ी पुलिस भी पहुंची..उसने राजाराम की लाश अपने कब्जे में लेने की कोशिश की तो लोगों ने उसे रोक दिया…लोगों का कहना था कि यह हत्या है और इसकी जांच की जाए।….डॉग स्कॉवड बुलाकर जांच कराई जाई…..लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस को घटनास्थर पर डॉग स्कावाड बुलानी पड़ी….पुलिस अधिकारी अपने प्रशिक्षित कुत्ते को लेकर मृत युवक की लाश तक पहुंचे….कुत्ते ने उसे सूंघने के बाद अपना काम करना शुरू कर दिया….वह रास्ते पर सुघंते हुए आगे बढ़ रहा था….वह कभी धीरे होता तो कभी तेज भागने लगता….वैसे ही लोगों का हुजूम भी तेजी से भाग रहा था…….इलाके के लोगों को लग रहा था कि पुलिस का यह कुत्ता आखिर हत्यारे तक पहुंचा देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ….पुलिस का यह प्रशिक्षित कुत्ता एक तालाब तक गयां और वहां रुक गया….उसके आगे वह नहीं बढ़ सका….अगर राजाराम बाउरी की हत्या हुई है तो उसके हत्यारे कहां गए….क्या इस तालाब तक आये थे….पुलिस ने तो इन सवालों के जवाब नहीं दिए, लेकिन लोगों का अनुमान है कि हत्यारे तालाब में आकर अपने शरीर को धोने के बाद वहां से चले गए होंगे।..इसलिए कुत्ता कुछ सुराग नही ढूंढ पा रहा है….इलाके के तृणमूल नेता बच्चू रायचौधरी ने घटना की सटीक जांच की आशा जताई है……—बाइट

हालांकि इधर राजाराम के बारे में परिवार ने जो बताया है वह यह आशंका है कि प्रेम प्रसंग में उसकी हत्या की गई है….परिवार के लोगों का कहना है कि सीतारामपुर के रहने वाले मोहम्मद समीर उर्फ काजू से उसका झमेला हुआ था…इस प्रेम प्रसंग में के कारण ही उसकी हत्या हुई है…उसकी बहन ने हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है………..बाइट (बहन)

जंगल में रहस्यमय परिस्थितियों में राजाराम बाउरी की लाश पाए जाने के  बाद से अब पुलिस ने जांच शुरू कर दी है…पुलिस ने एक महिला घटना के सिलसिले में पूछताछ की है…


बैरकपुर के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह का आसनसोल में हल्ला बोल

ममता बनर्जी नहीं मानतीं लोकतंत्र, अगले चुनाव में हार तय

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा संसद से पारित कराई गई कृषि बिल का अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ तृणमूल कांग्रस भी विरोध कर रही है। इसके खिलाफ आंदोलन भी किया है..लेकिन वहीं भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार की कृषि नीति का जोरदार समर्थन कर रही है..इसके लिए शुक्रवार को राज्य के अन्य हिस्सों की तरह आसनसोल में भी कृषि बिल के समर्थन में एक रैली निकाली गई.. यह रैली आसनसोल के स्टेशन मोड़ से शुरू होकर बीएनआर मोड़ के रविंद्र भवन तक आई..रैली में बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता शामिल हुए…रैली में शामिल बड़ा नाम बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह का रहा…ममता बनर्जी के कटु आलोचक अर्जुन सिंह रैली में शामिल में होने के लिए विशेष रूप से आसनसोल में आये थे….उन्होंने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ममता बनर्जी लोकतंत्र को नहीं मानती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को समाप्त कर दिया है। अर्जुन सिंह ने यह भी दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी 200 से अधिक सीटें हासिल करेगी और तृणमूल कांग्रेस को तीसरे नंबर की पार्टी बना देगी……….बाइट

अर्जुन सिंह ने कृषि बिल का विरोध करने के लिए भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला किया और कहा कि इस बिल के कानून बनने के बाद उनकी पार्टी के नेताओं की रोजी-रोटी बंद हो जाएगी, इसलिए वह इतना हल्ला मचा रही हैं…….बाइट

बीजेपी के मिशन बंगाल में मुकुल राय के हाथ में कमान क्यों?

कभी तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के काफी करीबी और उनके सेनापति रहे मुकुल रॉय को जब भारतीय जनता पार्टी ने पिछले दिनों पार्टी के सांगठनिक फेरबदल में उपाध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण दायित्व दिया तो यह साफ हो गया कि बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में उनकी बड़ी भूमिका होगी…और यह बात गुरुवार को बंगाल को लेकर दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं की हुई बैठक में सच भी हो गई।.. दरअसल बंगाल में 2018 के पंचायत चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के सफल सारथी साबित होने के बाद मुकुल राय अब विधानसभा चुनाव की कमान भी संभालेंगे।

केंद्रीय नेतृत्व उन्हीं के कंधों पर बंगाल फतह की जिम्मेदारी डाल रहा है। मुकुल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के साथ समन्वय करेंगे। यह महत्वपूर्ण फैसला बैठक में किया गया है….गुरुवार को दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर आगामी बंगाल चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय संयुक्त संगठन सचिव शिव प्रकाश, राष्ट्रीय महासचिव व बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय सचिव व बंगाल सह प्रभारी अरविंद मेनन मौजूद थे। इस बैठक में बंगाल के तीन शीर्ष नेता प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल राय और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा मौजूद थे।

नड्डा के आवास पर हुई बैठक में शीर्ष नेताओं ने विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की। यह निर्णय लिया गया है कि मुकुल राय को पश्चिम बंगाल चुनावों में भाजपा का सह पर्यवेक्षक बनाया जाएगा। उन्हें चुनाव की सारी जिम्मेदारी दी जा रही है। इससे पहले, मुकुल पंचायत और लोकसभा चुनावों में भाजपा के संयोजक थे। भाजपा ने राज्य में पहली बार लोकसभा में 18 सीटें जीती हैं। वोट से ठीक पहले निशीथ प्रमाणिक, सौमित्र खान, खगेन मुर्मू, अर्जुन सिंह और अनुपम हाजरा को तृणमूल नेताओं को भाजपा में शामिल कराया था। अनुपम को छोड़कर, सभी ने लोकसभा चुनाव जीते।

हालांकि, चुनाव के बाद, दिलीप बनाम मुकुल की लड़ाई शुरू हो गई थी। पिछले महीने ही मुकुल को दिल्ली में हुई एक बैठक में नहीं बुलाने के बाद बंगाल के सियासी गलियारे में तरह-तरह की बातें की जाने लगी थीं लेकिन अब तस्वीर साफ हो गई है।  भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मुकुल राय को बनाए रखने का इच्छुक है। यह स्पष्ट हो गया है। राजनीतिक हलकों के अनुसार, मतदान हमेशा बंगाल में हिंसा की रणनीति का खेल रहा है। यहां वोटिंग नहीं होती, करानी पड़ती है। अनुभवी राजनीतिज्ञ मुकुल राय इसे अच्छी तरह से समझते हैं। यही कारण है कि उन्हें बंगाल को जीतने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

दिल्ली में हुई बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पूजा से पहले कोलकाता जायेंगे। नड्डा भी उनके साथ होंगे। दरअसल अमित शाह  बंगाल पर स्वयं पकड़ बनाए रखना चाहते हैं…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल में खासा जोर दिया था…जब से दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी है तब से इस भगवा पार्टी का एक सपना रहा है कि उसकी सरकार बंगाल में भी बने….और अब तृणमूल मुखिया ममता बनर्जी के परचम को बंगाल के जिले-जिले और ब्लॉक-ब्लॉक में  पहुंचाने वाले कुशल संगठनकर्ता मुकुल राय के हाथों में बीजेपी ने यह जिम्मेवारी दी गई है कि वे पार्टी को 2021 के चुनाव में जीत के आंकड़े तक पहुंचाएं।

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